Posts

जूते का पेंचर

एक सुबह उठा और ऑफिस जाने को तैयार हो रहा था , तभी मैंने अपना जूता पहनने के दौरान तली में एक छोटी सी दरार देखी . हर बार की तरह मैंने अपने अपने दिल को तस्सली दी एक तारीख की . नौकरी पेशा आदमी हूँ तो सारे काम एक तारीख को ही होते है , कुछ पूरे हो जाते है  कुछ अधूरे रह जाते है और कुछ ख्वाब हो जाते है . खैर तभी माँ ने आवाज़ दी " नाश्ता कर ले " . किस्मत से उस दिन हल्की - हल्की बारिश हो रही थी . बाइक उठा कर ऑफिस पहुंच गया , और जैसे ही कॉलेज ( जहां मैं पढ़ाता हूँ )   की पार्किंग से अंदर जाने लगा तभी पैर में कुछ गीला सा लगा, उस दरार से पानी मेरे जूते के अंदर आगया था . बारिशो में भिगा रहने की आदत सी थी .टाइम पर क्लास लेना पहले कोचिंग पर फिर कॉलेज और फिर कोचिंग ,इन सब पर टाइम से पहुंचने के चक्कर में बारिश का ख्याल नहीं  रहता था . कार भी नहीं थी मेरे पास . अब कॉलेज में इधर उधर आने जाने पर पानी जूते में आ ही रहा था , मैंने इस सब को इगनोर किया . मैं भी जिद्दी हूँ सोचा अब तो एक तारीख को ही नया जूता लूँगा  .एक कारण और भी था लंबी  छुट्टियों के बाद अभी अभी कॉलेज दोबारा ज्वाइन कि...